Srinagar Garhwal: देश की सबसे लंबी रेल सुरंग बनी टनल-8, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेल परियोजना


उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश–कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेल परियोजना में निर्माणाधीन टनल संख्या–8 अब देश की सबसे लंबी रेल सुरंग बन गई है। करीब 14.58 किलोमीटर लंबी यह सुरंग देवप्रयाग से जनासू के बीच बनाई जा रही है और इसे 125 किमी लंबे महत्वाकांक्षी रेल प्रोजेक्ट की रीढ़ माना जा रहा है।

इस परियोजना का क्रियान्वयन रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) कर रहा है। पूरी रेल लाइन का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों के भीतर विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित और टिकाऊ ढांचा तैयार किया जा सके।

अत्याधुनिक तकनीक से तैयार हो रही सुरंग

टनल-8 के निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। सुरंग खोदने वाली मशीन (टीबीएम) के जरिए स्थिर चट्टानी क्षेत्रों में तेज और सटीक खुदाई की गई। न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड (एनएटीएम) का उपयोग कमजोर और जटिल भू-भाग में किया गया, जहां लगातार निगरानी के साथ काम हुआ। सुरंग के भीतर दोहरी रेल लाइन के लिए पर्याप्त चौड़ाई, आधुनिक जल निकासी व्यवस्था, वेंटिलेशन शाफ्ट (हवा के लिए ऊर्ध्व मार्ग) और आपातकालीन निकास मार्ग (एस्केप पैसेज) जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

भू-वैज्ञानिक चुनौतियों के बीच मिली बड़ी सफलता

हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह सुरंग भूकंपीय जोन-4 में आती है, जहां निर्माण कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। लगातार पानी का रिसाव, फॉल्ट ज़ोन और ढीली चट्टानें, उच्च दबाव और तापमान, सीमित पहुंच और कठिन लॉजिस्टिक्स (आवागमन व्यवस्था) की कठिनाइयों के बावजूद इंजीनियरों और श्रमिकों ने निरंतर प्रयास करते हुए सुरंग के दोनों सिरों का मिलान (ब्रेकथ्रू) सफलतापूर्वक पूरा किया, जो इस परियोजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

रेल परियोजना के लाभ

बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे चारधाम क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी। पर्यटन और तीर्थाटन को नई गति मिलेगी। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आपदा के समय तेज और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

टनल-8 का दोनों सिरों का मिलान इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी टीम ने उत्कृष्ट कार्य किया है। -हिमांशु बडोनी, मुख्य परियोजना प्रबंधक, आरवीएनएल

Source link



Source link